बाजार में गिरावट के दौरान म्यूचुअल फंड लॉन्गटर्म में फायदेमंद

बाजार की गिरावट और उसमें रिकवरी के समय का अंदाज न लगाए, एसआईपी जारी रखें

मुंबई: बीते पांच सालों में भारतीय म्यूचुअल फंड सेक्टर जितनी तेजी से बढ़ा है, उतना बीते 30 सालों में नहीं बढ़ा था। हालांकि मौजूदा गिरावट के चलते इस समय म्यूचुअल फंड्स में निवेश करने वाले नए निवेशक डरे हुए हैं और बीते साल में शुरुआत करने वाले निवेश किया गया पैसा रिटर्न की बजाए घट जाने से घबराए हुए हैं।

ऐसे में ये बात ध्यान में रखें कि दशकों से म्यूचुअल फंड्स में एसआईपी या अन्य माध्यम से निवेश करने वालों ने इस गिरावट में भी अपना पैसा नहीं निकाला है, बल्कि इस समय घटी हुए नेट एसेट वैल्यू यानि एनएवी पर पहले से कहीं अधिक यूनिट्स प्राप्त कर रहे हैं। क्योंकि उनको अनुभव है कि बाजार में तेजी आने पर, उनको इन दरों पर यूनिट्स नहीं मिलेंगे। ऐसे में वे बिना किसी चिंता के एडीशनल पर्चेज भी डाल रहे हैं।

बीते सालों में कई तरह की पेमेंट एप और ऑनलाइन सॉल्यूशंस के चलते काफी बड़ी संख्या में रिटेल इनवेस्टर्स म्यूचुअल फंड्स से जुड़े हैं। ऐसे में जो निवेशक इस दौर में भी मजबूती से निकल गए, उनको आगे बेहतर अनुभव मिलेगा। बाजार इस समय फंडामेंट्लस की बजाए सेंटिमेंट्स के कारण अधिक गिर रहे हैं। सेंटिमेंट्स ठीक होते ही बाजार वापसी करेंगे, हालांकि इसमें समय कितना लगेगा, इसकी पुष्टि अभी कोई नहीं कर रहा है।

31 जनवरी 2025 तक, इंडियन म्यूचुअल फंड सेक्टर के पास करीब 68.04 लाख करोड़ रुपए की एसेट्स अंडर मैनेजमेंट थीं। इनमें इक्विटी की हिस्सेदाी 29.46 लाख करोड़ रुपए थी। हालांकि जनवरी और फरवरी में नए निवेशकों के मुकाबले पुरानी सिप्स को बंद करवानों की संख्या थोड़ी सी बढ़ी है लेकिन कोई व्यापक रूझान नहीं देखा गया है। इस तरह की गिरावट में इस तरह के ट्रेंड्स बनते हैं लेकिन मार्केट के ठीक होते ही फिर हालात बदल जाएंगे। गिरावट के समय निवेशक मुनाफावसूली शुरू कर देते हैं जबकि वह समय खरीद को बढ़ाने का होता है।

इन फैक्ट्स पर नजर बनाए रखें

बीते समय में परफॉर्मेंस के आधार पर म्यूचुअल फंड चुनना जोखिम भरा है। हाल ही का पिछला परफॉर्मेंस हमेशा भविष्य की सफलता को तय नहीं कर सकता है क्योंकि फंड का रणनीति और बाजार के हालात बदलते रहते हैं। इसके बजाय, फंड की निरंतरता, लंबी अवधि के फंड मैनेजर के अनुभव और निवेश की प्रक्रिया के रिकॉर्ड को अच्छी तरह से परखें।

एक्पेंस रेश्यो को ध्यान में रखें
एक्सपेंस रेश्यो की अनदेखी लंबी अवधि में रिटर्न के मामले में भारी पड़ सकती है। इस पर विचार करें और इसको कम रखने के लिए कम लागत वाले इंडेक्स फंड या डायरेक्ट प्लान का उपयोग करें। लंबी अवधि में ये बेहतर रिटर्न सुनिश्चित करेगा।

बाजार को लेकर अनुमान न लगाएं
निवेशकों को ये समझ लेना चाहिए कि यह अनुमान लगाना असंभव है कि बाजार कब आगे बढ़ेगा और इसलिए बाजारों का समय निर्धारित करना मुश्किल है। इसीलिए एसआईपी को बाजार के हर हालात में फायदा लेने वाला टूल माना जाता है और इस को सख्ती से अपनाएं क्योंकि मंदी के दौर में भी ये आपके लिए फायदेमंद ही रहेंगे।

By MFNews